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टू सिमरन

सिमरन , तुम मेरी हो | तुम्हें कोई हक नहीं बनता , कि तुम उस लड़के से , प्यार कर लो | जो तुम्हें , यूरोप की ट्रिप पर मिला था | बाबू जी ने तो कहा , ki    जाओ जी लो अपनी जिंदगी , और तुम हाथ छुड़ा चली गयी | उस ट्रेन के पीछे पीछे , जिसमे वो गिटार थामे चढ़ा था | तुम्हें नही मालूम सिमरन मैं भी तुम्हारे लिए गिटार बजाना चाहता था हमेशा से तुम्हें अपने पास रखना चाहता था | पर बाबा ने गिटार सीखने ही नही दी | कहते थे ये भांड का काम हैं | बंदूक थमा , चिडिमारी पर भेज देते थे | तब से यही बात मन में घुस गयी | की मार कर मिले तो भी सही , कुड़ी हो या चिड़ि | अब कुछ कर नही सकता , कुछ कर सकता भी नही था | जो कर सकता था , सो कर लिया स्टेशन पर | ये राज जैसे लड़कों से मुझे हमेशा से चिढ है | न जाने क्या खा कर पैदा होते है | कभी इनके जैसे लड़कों के कारण , टीचर ताने मार कर प...

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