टू सिमरन



सिमरन,
तुम मेरी हो |
तुम्हें कोई हक नहीं बनता,
कि तुम उस लड़के से ,
प्यार कर लो |
जो तुम्हें ,
यूरोप की ट्रिप पर मिला था |
बाबू जी ने तो कहा,










ki  जाओ जी लो अपनी जिंदगी,
और तुम हाथ छुड़ा चली गयी |
उस ट्रेन के पीछे पीछे ,
जिसमे वो गिटार थामे चढ़ा था|
तुम्हें नही मालूम सिमरन
मैं भी तुम्हारे लिए गिटार बजाना चाहता था
हमेशा से तुम्हें
अपने पास रखना चाहता था |
पर बाबा ने गिटार सीखने ही नही दी |
कहते थे ये भांड का काम हैं |
बंदूक थमा ,
चिडिमारी पर भेज देते थे |
तब से यही बात मन में घुस गयी |
की मार कर मिले तो भी सही,
कुड़ी हो या चिड़ि |
अब कुछ कर नही सकता,
कुछ कर सकता भी नही था |
जो कर सकता था ,
सो कर लिया स्टेशन पर|
ये राज जैसे लड़कों से मुझे हमेशा से चिढ है |
जाने क्या खा कर पैदा होते है |
कभी इनके जैसे लड़कों के कारण ,
टीचर ताने मार कर पिटते थे |
शायद इसी बात का बदला ,
हम भी लेते थे |
स्कुल से घर के रस्ते पर,
उस लडके से |
पर उस रोज दाव उल्टा पड़ गया |
मैं स्टेशन पर रह गया ,
और तुम उस छिछोरे के साथ ,
ट्रेन  में चढ़ गयी |


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